New Budget 2024

10 Lakh Tax Rebate New Budget 2024 : तो क्या अब नही देना होगा 10 लाख तक इनकम पर कोई टैक्स?

10 Lakh Tax Rebate New Budget 2024 : दिनांक 1 फरवरी को बजट पेश किया जाएगा 2024 का अंतरिम बजट मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का आखिरी बजट जिसे पेश करने की जिम्मेदारी होगी वित्त मंत्री निर्मला सीता रामन के पास सभी की निगाहें टिकी हुई हैं इस बजट में उनके लिए खास क्या होगा इस बात पर आम टैक्स पेयर की उम्मीद हरबार की तरह यही है कि उनका टैक्स कम हो जाए कयास ये भी लगाए जा रहे हैं कि 10 लाख तक की आय पर टैक्स माफी की घोषणा हो सकती है। 10 Lakh Tax Rebate New Budget 2024

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अंतरिम बजट
यह आम बजट से थोड़ा अलग होता है जिस साल देश में लोकसभा चुनाव होते हैं उस साल य बजट आता है इसका असली उद्देश्य होता है कि चुनाव के पहले तक सरकार को पैसों का लेनदेन करने में मदद करें आमतौर पर अंतरिम बजट में ज्यादा बड़े बदलाव नहीं किए जाते हैं लेकिन चुनाव के जस्ट पहले सरकारें चाहती हैं कि वो जनता को ज्यादा से ज्यादा खुश कर सकें तो इसलिए इसमें कभी-कभी लोकप्रिय बदलाव भी देखे जाते हैं य कारण है कि लोग इस बार उम्मीद करें हैं कि इनकम टैक्स में छूट की सीमा बढ़ सकती है पिछले साल 2023 के बजट में टैक्स छूट पर इस तरह के बदलाव हुए थे

इनकम टैक्स रिबेट की सीमा 5 लाख से बढ़ाकर 7 लाख कर दी गई थी हालांकि ये राहत सिर्फ न्यू टैक्स रेजीम धारकों के लिए थी लोगों का मानना है कि इस बार अगर ये लिमिट बढ़ाकर 10 लाख कर दी जाए तो आम आदमी की तो मजे ही मजे है 2023 में टैक्स एसेंशन लिमिट भी 2.5 लाख से बढ़कर 3 लाख तक हो गई थी खैर यह बात भी सच है कि टैक्स पेयर को जितना टैक्स बचाने का मौका मिले वो उतना खुश है इन सब चीजों को लेकर और खास तौर पर क्या बजट में टैक्स छूट सीमा 10 लाख हो सकती है। 10 Lakh Tax Rebate New Budget 2024

 

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टैक्स एक्सपर्ट विनोद रावल जी की इस पर राय क्या है।

विनोद रावल जी ने बताया की ओल्ड और न्यू टैक्स रेजीम में जो डिफरेंस है स्टैंडर्ड डिडक्शन दोनों में इन्होने दे दिया पिछली बार उसके अलावा जो डिफरेंस है वो 80C का डिडक्शन ओल्ड में मिलता है नए में नहीं मिलता है इसी तरह से जितनी सेक्शन 80 की छूट है 70 के आसपास जो है वो न्यू टैक्स रेजीम में नहीं मिलती ओल्ड में मिलती थी फर्क तो इतना है लेकिन इसके साथ-साथ इस बार बिल्कुल इस बात की पूरी उम्मीद की जा रही है कि जैसे पिछली बार सरकार ने स्टैंडर्ड डायरेक्शन दे दिया न्यू टैक्स रेजीम में न्यू टैक्स रेजीम में अगर एक भी रिडक्शन उधर शिफ्ट हो जाती है

जैसे हाउसिंग उनका इंटरेस्ट है 2 लाख रूपये का या 80C है तो बिल्कुल आपकी जो बात है कि 10 लाख तक की छूट संभव है ऐसा नहीं है कि नहीं हो सकता इसकी पूरी उम्मीद की जा सकती है कि हो सकता है कि सरकार क्योंकि मोदी सरकार ने पिछली बार भी जैसे अनाउंस किया 7 लाख तक कोई टैक्स नहीं तो न्यू टैक्स रेजीम में बिल्कुल ऐसा संभव है कि अगर कोई 2 लाख का रिबेट 80C जिसकी पूरी पूरी उम्मीद है क्योंकि हम चाहते हैं कि सरकार जो है कुछ छूट दे सेविंग को प्रमोट करे 20 पर इनकम टैक्स का कलेक्शन ज्यादा आया है

इस बार पिछली बार से नंबर ऑफ टैक्स पेयर बढ़ गए हैं तो टैक्स पेयर को इंसेंटिव भी तो मिलना चाहिए खाली ऐसा थोड़ी कि एक ही तरफ रखेंगे आप तो बिल्कुल मुझे पूरी पूरी उम्मीद है कि हमारी बात कहीं ना कहीं यह सरकार सुन रही होगी और सरकार बिल्कुल जैसे कॉन्फिडेंट है के पूर्ण बजट जैसा प्रधानमंत्री ने कहा संसद में कि पूर्ण बजट भी हम ही पेश करेंगे तो बिल्कुल इसी तरह से 10 लाख भी होने वाला है उम्मीद रखिए ऐसा होने के पूरे पूरे चांसेस हैं। 10 Lakh Tax Rebate New Budget 2024

 

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टैक्स शूट के अलावा लोग टैक्स लैब पर भी नजरें गड़ाए बैठे हैं टैक्स लैब में बदलाव की भी लगातार मांग होती रही है इसका एक कारण है कि इंफ्लेशन यानी महंगाई चीजों की भरती कीमतों ने आम आदमी की जेब पर चोट की है सीधा कहे तो बचत पर चोट और फिर उसके ऊपर टैक्स का बोझ इसलिए लोगों की केंद्र सरकार से उम्मीद है कि टैक्स लैब्स में बदलाव कर भी उन्हें इस से राहत दिलाएगी इसमें या तो टैक्स की शर्तें आसान कर दी जाए टैक्स के ब्रैकेट बढ़ा दिए जाए फिर टैक्स के प्रतिशत को कम कर दिया जाए यह मांगे लगातार आम आदमी की तरफ से आ रही हैं

वैसे इसके अलावा एक अच्छी खबर भी है बजट पेश करने से ठीक एक दिन पहले 31 जनवरी को सरकार ने मोबाइल फोन के स्पेयर पार्ट्स की इंपोर्ट ड्यूटी 15 पर से घटाकर 10 करने का फैसला लिया सरकार के गजट में आई जानकारी के मुताबिक इसका प्रभाव बैटरी कवर्स मेन लेंस बैक कवर्स और प्लास्टिक मेटल के अन्य मैकेनिकल आइटम्स की कीमत पर पड़ेगा यह बात आप जानते ही होंगे कि देश में ज्यादातर मोबाइल निर्माता कंपनियां मोबाइल असेंबल करने का काम करती है मेड इन इंडिया पूरी तरह मेड इन इंडिया नहीं है क्योंकि मोबाइल के अधिकतर स्पेयर पार्ट्स बाहर बनते हैं वहां से बड़ी मात्रा में इंपोर्ट किए जाते हैं

जिनका इस्तेमाल फिर असेंबलिंग के दौरान होता है इसलिए उम्मीद की जा रही है कि स्पेयर पार्ट्स पर इंपोर्ट ड्यूटी कम हो जाने से मोबाइल कंपनियों का इनपुट कॉस्ट घटेगा तो उसका थोड़ा बहुत फायदा आम ग्राहकों को भी मिलेगा वैसे देखा जाए तो यह कटौती हेडलाइन के हिसाब से तो अच्छी लगती है लेकिन ग्राहकों तक सीधा इसका बहुत ज्यादा फायदा नहीं पहुंचता क्योंकि कटौती चुनिंदा पार्ट्स पर है और मोबाइल फोन की कीमत सिर्फ चुनिंदा पार्ट्स से तय तो होती नहीं है एक बड़ी प्रणाली है जिससे होकर मोबाइल फोन फैक्ट्री से यूजर्स के हाथों तक पहुंचते हैं

इसमें मोबाइल को बनाने वाली फैक्ट्री मार्केटिंग कंपनी होलसेलर डीलर रिटेलर्स और फिर कस्टमर सब शामिल होते हैं कुल मिलाकर आपको फायदा होगा या नहीं यह हम दावे के साथ नहीं बता सकते हैं पर खबर अच्छी है इसके अलावा चूंकि डायरेक्ट टैक्स की बात हो रही है तो एक आंकड़ा यहां पर चिंता बढ़ाने वाला है कुछ दिनों पहले सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस यानी सीबीडीटी ने एक डेटा रिलीज किया था जिसमें फिस्कल ईयर 2022 की जानकारी दी गई थी बिजनेस वर्ल्ड की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस दशक में डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन और कुल टैक्स कलेक्शन के अनुपात में गिरावट आई है

आसान शब्दों में कहे तो सरकार कुल जितना टैक्स कलेक्ट कर रही है उसमें से डायरेक्ट टैक्स की सहभागिता कम हुई ये चिंता का विषय क्यों है, दरअसल इनडायरेक्ट और डायरेक्ट टैक्स के दो प्रकार हैं इनडायरेक्ट टैक्स वो होता है जिसे व्यक्ति खुद जमा करता है जैसे इनकम टैक्स जबकि डायरेक्ट टैक्स वो टैक्स होता है जिसे आप सीधे सरकार के खाते में नहीं भेजते जैसे कि कोई सामान आपने खरीदा उस पर जीएसटी लगा जो सरकार के खाते में गया लेकिन आपने सीधे तौर पर नहीं दिया ऐसा नहीं है कि जीएसटी एक मात्र जरिया है

इनडायरेक्ट टैक्स का एक्साइज ड्यूटी इंपोर्ट ड्यूटी ऐसे और टैक्स हैं व इंपोर्ट ड्यूटी जो मोबाइल फोन के कुछ स्पेयर पार्ट्स पर कम किया गया है इसका मतलब यह है कि इस देश का हर आदमी सरकार को टैक्स देता है चाहे इनकम टैक्स देता हो या फिर कोई सामान खरीद कर इनडायरेक्ट टैक्स इस आर्टिकल की शुरुआत में हमने जिन टैक्स की बात की वो स्लैब पर आधारित हैं जोन स्लैब्स के अंदर हैं उन्हें वो टैक्स देना होगा नहीं आए तो टैक्स जमा नहीं करना ज्यादा कमाई तो ज्यादा टैक्स कम कमाई पर कम टैक्स मगर इनडायरेक्ट टैक्स की खासियत है इसमें कोई स्लैब नहीं है

एक चीज को खरीदते वक्त जितना टैक्स किसी ज्यादा कमाई करने वाले व्यक्ति के लिए है उतना ही किसी कम कमाई करने वाले व्यक्ति के लिए भी है इसलिए कुल टैक्स में डायरेक्ट टैक्स का कम होना और इनडायरेक्ट टैक्स का बढ़ना अच्छे संकेत नहीं है रिपोर्ट में बताया गया कि फाइनेंशियल ईयर 2013-14 में कुल टैक्स पर डायरेक्ट टैक्स का रेशियो 56.3 था जो 10 साल में फाइनेंशियल ईयर 2022 में घटकर 54.6 दो हो गया इसमें 1.7 का गैप मेजर्ली इनडायरेक्ट टैक्स से फिल हुआ प्रतिशत के हिसाब से सुनने में तो फर्क छोटा नजर आता है

असल में इसकी वैल्यू हजारों करोड़ में होती है यह बात डायरेक्ट टैक्स और कुल टैक्स के रेशो की इसके अलावा एक अनुपात डायरेक्ट टैक्स और जीडीपी के बीच भी होता है इस फाइनेंशियल ईयर डायरेक्ट टैक्स और जीडीपी रेशियो में बढ़त की उम्मीद है जो इकोनॉमिक्स के लिहाज से अच्छी खबर है।

फिलहाल इतना ही बाकी अपडेट्स के लिए आप पढ़ते रहिए TodaysTimes24

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